
नेताजी का आजाद भारत के निर्माण में योगदान तथा राजनैतिक मूल्यों की प्रसंगिकताऐं विषय पर हुई परिचर्चा
-राष्ट्रीय अध्यक्ष मेघवाल ने सरूपगंज में परिचर्चा के दौरान क्रांतिकारी व ऐतिहासिक उद्बोधन दिया
-पुखराज परिहार-
सिरोही।अखिल भारतीय ‘‘भारत-रत्न’’ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस राष्ट्रीय सेवा समिति (नेताजी फाउण्ड़ेशन) के तत्वावधान में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की 129 वीं जन्म जयंती एवं ’’पराक्रम दिवस’’ पर मनाए जा रहे नेताजी सुभाष कल्याण साप्ताहिक कार्यक्रम का आज विधिवत् शुभारम्भ देश के दो राज्यों में किया गया।महाराष्ट्र के मुम्बई में नेताजी फाउण्ड़ेशन के राष्ट्रीय प्रधान संरक्षक एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्वव ठाकरे की अगुवाई की मातोश्री निवास में दोपहर 12ः30 बजे किया।वहीं दूसरी ओर राजस्थान के सिरोही जिले में सरूपगंज कस्बे के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में नेताजी फाउण्डेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लुम्बाराम मेघवाल की अगुवाई में दोपहर 12ः30 बजे वंदेमातरम गायन की प्रस्तुति के साथ किया गया।

सरुपगंज के कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम में ‘‘तुम मुझे खुन दो,मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’’ नारे के उद्घोषक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का वर्तमान आजाद भारत के निर्माण में योगदान एवं उनके विचारों तथा राजनैतिक मूल्यों की वर्तमान समय में प्रसंगिकताऐं विषय पर परिचर्चा हुई।

नेताजी फाउण्ड़ेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मेघवाल ने इस दौरान अपने क्रांतिकारी व ऐतिहासिक उद्बोधन में फिर दोहराते हुए कहा कि नेताजी नहीं होते तो भारत को आजादी नहीं मिलती।उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने हिटलर सहित जापान के प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो से मुलाकाते की,जापान के प्रधानमंत्री ने सोचा कि नेताजी एक सामान्य नेता होगा,मेरे पास हहदर्दी मांगने आया है अपितु जैसे ही बोस उनके कमरे में घुसे कमरा नहीं,हवा तक बदल गई।नेताजी की आँखे जलती थी गुलामी को चीर देने वाली आग, आवास ऐसी जैसे देश के हर बच्चे का दर्द उनमें समाया हो।जापानी प्रधानमंत्री ने पहली बार अपने जीवन में किसी गुलाम देश के नेता में शेर की दहाड देखी थी।जापानी प्रधानमंत्री तोजो को लगा की बोस मदद मांगने आये है।लेकिन बोस ने मेज पर हाथ मारा और कहा कि ‘‘कि जापान चाहे साथ दे या न दे भारत जरूर आजाद होगा।फर्क सिर्फ इतना है कि आप इतिहास का हिस्सा बनेंगे या नहीं यह सुनकर तोजो की सांसे अटक गई।’’ यह आदमी डराने नहीं आया था इतिहास लिखने आया था।जब बोस ने सैनिक नहीं शेर मांगे तो तोजो ने पुछा आपको जापानी सैना कितनी चाहिए,नेताजी मुस्कराये और बोले मुझे आपकी सेना नहीं बस मुझे इतना साथ चाहिए कि मैं अपनी कौम के जवानों को शेर बना सकूं।

जापानी प्रधानमंत्री दंग रह गये।ऐसा आत्मविश्वास उसने सिर्फ महापुरूषो में देखा था और तभी जापान का प्रधानमंत्री उठकर खडा हो गया और कहने लगे इतिहास गवाह हैं मीटिंग खत्म होने पर जापान का प्रधानमंत्री अपनी कुर्सी से उठकर नेताजी से हाथ मिलाया और कहा कि आपके साथ रहकर कोई तटस्थ नहीं रह सकता।या तो आपका दुश्मन बनना पडेगा या आपका सैनिक।यही पल था जब जापान ने बोस को अपना दोस्त,अपना साथी, अपना योद्धा मान लिया।क्योंकि सुभाषचन्द्र बोस कोई नेता नहीं बल्कि एक चलते-फिरते इंकलाब थे।उनके सामने देश नहीं जन्मभूमि थी,लडाई नहीं कर्त्तव्य था।मौत नहीं आजादी थी और इस आग को देखकर जापान का प्रधानमंत्री भी बोला ‘‘भारत को आजादी दिलाने वाला आदमी मेरे सामने खड़ा हैं’’।यह था नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का व्यक्तित्व, कृतिव,उनकी वीरता, बहादूरी व त्याग की मिशाल जिससे आज भारत आजाद है।

इस मौके पर देश के नेताओं को आडे हाथो लेते हुए मेघवाल ने कहा कि अगर नेताजी नही होते तो भारत आजाद नहीं होता,ऐसी देश के नेताओं को सुभाषचन्द्र बोस से प्रेरणा लेनी चाहिए।कार्यक्रम में विद्यालय की बालिकाओं ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत जज्बे से भरे सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम की उम्दा प्रस्तुति दी।जिसे उपस्थित लोगो ने खुब सराहा।कार्यक्रम में मेघवाल ने ‘बिजली बचाओं,चोरी रोको’ राष्ट्रीय कार्यक्रम की महता को बालिकाओं के संग अपने विचारों को साझा किया।

कार्यक्रम में विद्यालय के संस्था प्रधान भरत पुरोहित ने भी नेताजी पर परिलक्षित वार्ता दी एवं बालिका व युवाओं को उनके पद्चिन्हो पर चलने का आव्हान किया।व्याख्याता प्रवीण कुमार ने मंच का संचालन किया।कार्यक्रम की शुरुआत में राष्ट्रीय अध्यक्ष मेघवाल का विद्यालय परिवार की ओर से पुष्पाहार पहनाकर वेलकम किया गया।

कार्यक्रम में नेताजी फाउण्ड़ेशन के जिला कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल,जोधपुर डिस्कॉम सरूपगंज के सहायक अभियन्ता लव मीणा,ड्राईवर गणेश,उप प्रधानाचार्य आशा कुमारी,व्याख्याता प्रकाशचन्द पुरोहित,गजेन्द्रसिंह बारहड,कविता चौधरी,भजनलाल विश्नोई,अशोक कुमार,वागाराम,उषा मणी,प्रकाश कुमार,कुलदीप कुमार,हेमलता,गोविन्दराम,गीता शर्मा, कपिल शर्मा, हेमन्त कुमार शर्मा, अभिषेक गहलोत सहित प्रबुद्ध नागरिक व स्कूली छात्र छात्राओं एवं अध्यापिकाओं ने रूचि पूर्वक भाग लेकर इसे सफल बनाया।



