
धन से बड़ा धन है स्वास्थ्य
-भगवान धन्वंतरि की पूजा से मिलता है आरोग्य का वरदान
दीपावली से पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व इस बार शुक्रवार 06 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
सुमेरपुर के पंडित सुरेश गौड़ ने सिरोही हैडलाइन को बताया कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला यह पर्व केवल धन-संपत्ति का नहीं,बल्कि स्वास्थ्य और दीर्घायु का भी पर्व है।इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है।

समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का अवतरण-
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए क्षीरसागर का मंथन किया।मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया।मंथन से लक्ष्मी,ऐरावत,उच्चैःश्रवा सहित अनेक दिव्य रत्न प्रकट हुए।अंत में भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्हें भगवान विष्णु का अंशावतार और आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है।उन्हीं के प्राकट्य की स्मृति में धनतेरस मनाया जाता है
आरोग्य के देवता धन्वंतरि-
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद, चिकित्सा और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।मान्यता है कि धनतेरस पर उनकी पूजा करने से परिवार में रोग-शोक दूर होते हैं और सुखी,निरोगी व दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि जीवन में धन-संपत्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का होना भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे करें पूजा-
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।घर के मंदिर और पूजा स्थल की सफाई कर भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।फूल,अक्षत, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित कर श्रद्धा अनुसार मंत्र जाप करें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना करें। शाम को घर में दीपक जलाकर मां लक्ष्मी व भगवान कुबेर की भी पूजा करें।
शाम को मुख्य पूजन के लिए-
माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि, कुबेर जी की मूर्ति-पीला कपड़ा, लाल कपड़ा,गंगाजल,पंचामृत (दूध,दही,घी,शहद,शक्कर)चावल (अक्षत),रोली,मौली, हल्दी,कुमकुम,अबीर-गुलाल धूप, दीप,घी के 05 दीपक, कपूर, अगरबत्ती,माचिस,फूल,कमल का फूल,गेंदा,गुलाब, माला,पान, सुपारी,लौंग,इलायची,नारियल,05 प्रकार के फल,बताशे,मिठाई,खील-बताशे,धनिया,गुड़ आदि चढाकर आरती कर प्रसाद ले।
धनतेरस पर विशेष खरीदारी- सोना-चांदी का सिक्का,नया बर्तन-पीतल,तांबा,स्टील,
धनिया के बीज,हल्दी की गांठ, कमल गट्टा-05 नग,गोमती चक्र- 05 नग,कौड़ी-05 नग व झाड़ू इत्यादि
यम दीपदान के लिए-
आटे का 01 बड़ा दीया,सरसों का तेल,04 बाती,काले तिल,थोड़े चावल
पूजन विधि-
शाम को 5:49 से 8:13 बजे गोधूलि प्रदोश शुभ मुहूर्त में धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी का पूजन कर, नया बर्तन भरकर रखें और मुख्य द्वार पर यम का दीया जलाएं।
धनतेरस पर धन की पूजा के साथ-साथ अपने और अपने परिवार के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करे। धन तेरस पर कहीं कहीं महिलाएं प्रात:काल घर पर मिट्टी व आंवल के फूल लाकर शाम को सभी पूजा करते है। आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सक धन्वंतरि भगवान को आराध्य देव के रूप में पूजते हैं।




























