
रुप चौदस अर्थात छोटी दीपावली आज
7 नवंबर 2026
रूप चौदस:सौंदर्य,स्वच्छता और सकारात्मकता का पर्व
भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व और आध्यात्मिक संदेश है। दीपावली महोत्सव के अंतर्गत मनाया जाने वाला रूप चौदस का पर्व सौंदर्य,स्वच्छता,आरोग्य और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।इसे नरक चतुर्दशी,छोटी दीपावली और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रूप चौदस के दिन प्रातःकाल अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। इस दिन शरीर पर तेल लगाकर उबटन किया जाता है तथा स्नान के माध्यम से तन और मन की शुद्धि का संकल्प लिया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सौंदर्य, आरोग्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है।पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के सहयोग से अत्याचारी नरकासुर का वध कर हजारों बंदियों को मुक्त कराया था।इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश देता है
रूप चौदस के अवसर पर घरों की साफ-सफाई,रंगोली, दीप सजावट और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।शाम के समय दीप प्रज्वलित कर घर-आंगन को रोशनी से सजाया जाता है।महिलाएं एवं पुरुष पारंपरिक रूप से साज-श्रृंगार कर इस पर्व की खुशियों में शामिल होते हैं।
वास्तव में रूप चौदस का महत्व केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं है।यह पर्व हमें अपने विचारों,व्यवहार और आचरण को भी सुंदर बनाने की प्रेरणा देता है।मन में प्रेम, दया,करुणा,सद्भाव और सकारात्मक सोच का दीप प्रज्वलित करना ही सच्चे अर्थों में जीवन को सुंदर बनाना है

आइए,इस पावन पर्व पर हम अपने तन के साथ मन की स्वच्छता का भी संकल्प लें ।
आप सभी को रूप चौदस एवं छोटी दीपावली की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं।

दीपावली त्यौहार पर पूजन मुहूर्त
दीपावली-दिनांक 8 नवंबर 2026 रविवार (कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी) को प्रदोष व्यापिनि अमावस्या में दीपावली का महालक्ष्मी पूजन उत्सव है।इस दिन गादी स्थापना,स्याही भरने, कलम-दवात संवारने हेतू श्रेष्ठ समय चंचल वेला में प्रातः08.17 बजे से 09.38 बजे तक,लाभ अमृत वेला में प्रातः 09.38 बजे से दोपहर 12.21 बजे तक, अभिजीत वेला में दोपहर 12.00 बजे से 12.43 बजे तक तथा शुभ वेला में दोपहर 01.43 बजे से 03.04 बजे तक है।
दिन में पूजन मुहूर्त-
श्री पूजन हेतु दिन में श्रेष्ठ समय वृश्चिक स्थिर लग्न प्रातः 07.35 बजे से 09.51 बजे तक तथा कुंभ लग्न में दोपहर 01.31 बजे से 03.09 बजे तक है के श्रेष्ठ मुहूर्त है।
श्री पूजन मुहूर्त-
श्री पूजन हेतु श्रेष्ठ समय सायं गोधूलि प्रदोष वेला सायं 05.47 बजे से रात्रि 08.11 बजे तक, वृषभ लग्न सायं 06.15 बजे से रात्रि 08.11 बजे तक, मिथुन लग्न रात्रि 08.11 से 10.25 बजे, निशिथकाल मध्यरात्रि 12.00 से 12.43 बजे, शुभ-अमृत चौघड़िया सायं 05.56 बजे से रात्रि 09.08 बजे तक सिंह लग्न रात्रि 12.43 बजे से 02.58 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त है।
श्री रोकड़ मिलान-
दिनांक 10 नवंबर 2026 मंगलवार (कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा) को रोकड़ मिलान का श्रेष्ठ समय चंचल वेला प्रातः 09.39 बजे से प्रातः 11.00 बजे तक तथा लाभ अमृत वेला प्रातः 11 बजे से दोपहर 01.43 बजे तक है।

पंडित सुरेश गौड़,प्रधान संपादक
सनातन ज्योतिष पंचांग,
B-66 आदर्श कॉलोनी सुमेरपुर





























