
सिदरथ में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन किया ध्रुव चरित्र कथा का वर्णन
-सच्ची लगन और अटूट संकल्प हो,तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता हैं-ओझा
(सिरोही हैडलाइन)
सिरोही।रामेश्वर महादेव मंदिर सिदरथ में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित जनार्दन ओझा ने ध्रुव चरित्र कथा का वर्णन किया।उन्होंने धु्रव चरित्र के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया।उन्होंने कहा कि एक आदर्श माँ विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों को सही आध्यात्मिक मार्गदर्शन दे सकती है।उन्होंने कहा कि अगर सच्ची लगन और अटूट संकल्प हो,तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। आयोजक परिवार राजेश सोनी एवं संत गरीबदास भक्त मंडल द्वारा कथा स्थल तक आने व जाने के लिए सिरोही से निःशुल्क वाहन की व्यवस्था भी की गई है।
व्यास पीठ से आज कथा के मुख्य प्रसंग भक्त ध्रुव चरित्र पर प्रकाश डालते हुए पूज्य पंडित जनार्दन ओझा ने कहा कि मात्र 05 वर्ष की कोमल आयु में बालक ध्रुव ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अखंड नारायण भक्ति से उस परम पद को प्राप्त कर लिया,जिसे बड़े-बड़े योगी-मुनि भी नहीं पा पाते।उन्होंने कहा कि सत्संग से हमारे आचरण उत्तम बनते हैं,ध्रुव चरित्र से हमें सीखना चाहिए कि हमें हमारे लिए कहे गए अपमानित शब्दों से भी प्रेरणा लेना चाहिए।किसी के बुरे आरोप का जवाब हमें कुछ अच्छा करके देना चाहिए।परमात्मा परिश्रम साध्य नहीं कृपा साध्य है। इस मौके पर संकीर्तन मंडली के सदस्यों ने प्रभु महिमा का गुणगान किया।उन्होंने कई मनमोहक भजन प्रस्तुत किए,जिन पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।

माधव से जुड़ते ही मिट जाता है काल का भय-
पंडित ओझा ने कहा,मृत्यु का भय मिटाना है तो माधव से रिश्ता जोड़ो।संसार में हर मनुष्य किसी न किसी भय में जी रहा है और सबसे बड़ा भय मृत्यु का है।लेकिन,जो जीव अपनी आत्मा को उस परमपिता परमात्मा माधव के चरणों में सौंप देता है उसके जीवन से काल का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।माधव से जोड़ा गया रिश्ता ही इस लोक में शांति और परलोक में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस अवसर पर आयोजक परिवार की छोटी बेटी जेनी सोनी का बांके बिहारी का स्वरूप सभी भक्तों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ था।
व्यवस्थाओं को बनाए रखने में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और आयोजन समिति के सदस्यों ने सराहनीय भूमिका निभाई।इस अवसर पर भगवतीलाल ओझा,पुखराज, अशोक,बाबूमल,नरेश,बबलू,सुरेश,भंवर,महेंद्र दवे,हेमंत ओझा,नरेंद्र ओझा,मनीष त्रिवेदी सहित भारी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति और धर्मप्रेमियों ने इस ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम में सहभागिता की।अंत में बांके बिहारी जी और व्यास पीठ की भव्य आरती कर महाप्रसाद का वितरण किया गया।

व्यक्ति की निष्ठा और आस्था राम में हो,न कि किसी व्यक्ति में-
भागवत कथा व्यास एवं राज ज्योतिषाचार्य पंडित जनार्दन ओझा ने कहा कि 500 वर्षौ के संघर्ष के बाद अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण से सभी सनातनी प्रेमी आहत है।उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति धर्मनिष्ट न होकर व्यक्तिनिष्ठ हो जाता है,उसकी आस्था राम में न हो कर किसी व्यक्ति या संगठन, संस्था में हो जाय तब इस तरह की घटना घटती है।
शहर में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने ये बात कहते हुए कहा कि धार्मिक होना और धार्मिकता का दिखावा करना दो विपरीत मार्ग है। वर्तमान समय में लोग धार्मिक कम और धार्मिकता का दिखावा ज्यादा करने लगे है।उन्होंने कहा कि सरकार ने मंदिरों के विकास के लिए खूब काम किया है।सरकारें इसे ‘आस्था से अर्थ व्यवस्था के सूत्र में जोड़कर धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के प्रयास में लगी हुई है।किन्तु तीर्थस्थलों के व्यावसायीकरण के कारण इन जगहों की मूल आध्यात्मिक और शांत पहचान खोती जा रही है,जो साधकों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हम लोग पाश्चात्य संस्कृति की अंधाधुंध दौड़ में शामिल हो रहे हैं।अपनी सांस्कृतिक पहचान व रीति रिवाज को भुलाते जा रहे है,यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सत्संग और भगवत कथाओ से हम अपने संस्करो की ओर लौट सकते है। ओझा ने कहा कि सिदरथ में चल रही भागवत कथा दिव्य कथा है क्योंकि यह एक संत के लिए गए संकल्प को पूरा करने के लिए उनके शिष्य द्वारा आयोजित की गई है।




